कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार विधान परिषद के सदस्य एवं जेपी विचार मंच के अध्यक्ष डॉ. संजय प्रकाश मयूख ने की। उन्होंने कहा कि जेपी का जीवन और उनके विचार आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा देते हैं। उनकी विरासत को जीवित रखने का अर्थ उनके आदर्शों को समझना और सामाजिक जीवन में अपनाना है। जेपी की जयंती उनके संघर्ष, नैतिक साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का अवसर है।विशिष्ट अतिथि श्रीमती किरण घई ने कहा कि जेपी ने युवाओं को रचनात्मक नेतृत्व प्रदान कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संगठित किया। उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक डॉ. संजीव चौरसिया ने जेपी के लोकतांत्रिक आदर्शों और सामाजिक परिवर्तन में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। पद्मश्री डॉ. विमल जैन ने अपनी पुस्तक के माध्यम से छात्र आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भों और उससे जुड़े सवालों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर प्रकाश डाला। कुमार राघवेंद्र और रोहित सिंह ने भी जेपी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए लोकतांत्रिक चेतना मजबूत करने पर जोर दिया।संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि जेपी ने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के हित को प्राथमिकता दी। उनका जीवन त्याग, संघर्ष, नैतिकता और जनसेवा का उदाहरण है। नई पीढ़ी को उनके विचारों और ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराना समय की मांग है।कार्यक्रम का संचालन सुमित श्रीवास्तव ने किया, जबकि विनोद शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर शेखर कुशवाहा, अक्षत प्रियेश, कीर्ति सिंह, अमन अमित, सैयद माज़ अरफ़ी, अंकित सिन्हा, शुभम वर्मा, बरुण सिंह, रजनीश रंजन, धीरज पांडेय, राजीव मोहन और कमल नयन श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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