पटना। अगर आपने अपनी बाइक, कार या व्यावसायिक वाहन में चोरी से बचाव अथवा गाड़ी की लोकेशन जानने के लिए जीपीएस ट्रैकर लगवा रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर उन वाहन मालिकों को सावधान रहने की जरूरत है, जिनकी गाड़ियों में पुराने 2G नेटवर्क पर काम करने वाले जीपीएस उपकरण लगे हैं। दूरसंचार तकनीक में बदलाव के साथ पुराने नेटवर्क पर निर्भर उपकरणों के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, भारत में सभी 2G नेटवर्क को एक साथ बंद करने की अभी कोई पुष्ट राष्ट्रव्यापी तारीख घोषित नहीं हुई है।
**जीपीएस बंद नहीं होगा, लेकिन लोकेशन भेजने में आ सकती है परेशानी**
दरअसल, बहुत से लोग मानते हैं कि जीपीएस ही मोबाइल नेटवर्क के सहारे गाड़ी की लोकेशन पता करता है, जबकि वास्तविकता कुछ अलग है। जीपीएस डिवाइस सैटेलाइट की मदद से गाड़ी की लोकेशन निर्धारित करता है। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क के जरिए उस लोकेशन की जानकारी आपके मोबाइल ऐप या सर्वर तक पहुंचती है। यदि किसी वाहन में लगा ट्रैकर केवल 2G नेटवर्क पर काम करता है और संबंधित क्षेत्र में उसका नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहता, तो गाड़ी की लाइव लोकेशन मिलनी बंद हो सकती है। ऐसे में वाहन चोरी होने पर उसे ट्रैक करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
**बिहार में क्यों जरूरी है सतर्कता?**
बिहार में पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा, पूर्णिया से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों के अलावा मालवाहक गाड़ियों, टैक्सियों और दूसरे व्यावसायिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। कई वाहन संचालक अपनी गाड़ियों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर पर निर्भर हैं। खासकर ट्रांसपोर्ट कारोबार, डिलीवरी सेवाओं और वाहन बेड़े का संचालन करने वालों के लिए लगातार लोकेशन मिलना महत्वपूर्ण है।
यदि किसी इलाके में संबंधित मोबाइल नेटवर्क कमजोर पड़ता है या भविष्य में ऑपरेटर उस नेटवर्क को बंद करता है, तो पुराने जीपीएस उपकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बिहार में सभी 2G सेवाएं अभी बंद हो रही हैं या सभी पुराने जीपीएस उपकरण एक साथ काम करना बंद कर देंगे।
**वाहन मालिक अभी क्या करें?**
सबसे पहले अपने जीपीएस उपकरण की कंपनी, मॉडल और नेटवर्क क्षमता की जानकारी लें। जांचें कि डिवाइस केवल 2G सपोर्ट करता है या 4G नेटवर्क पर भी काम कर सकता है। जीपीएस सेवा देने वाली कंपनी से लिखित रूप में पूछें कि डिवाइस में इस्तेमाल किया गया सिम किस नेटवर्क पर काम करता है और भविष्य में नेटवर्क बदलने की स्थिति में क्या विकल्प उपलब्ध होंगे।
अगर नया जीपीएस ट्रैकर खरीदने की योजना है, तो 4G समर्थित उपकरण लेना भविष्य के लिहाज से उपयोगी हो सकता है। हालांकि, केवल 4G लिखा देखकर खरीदारी न करें। अपने क्षेत्र में नेटवर्क कवरेज, डिवाइस की अनुकूलता, सिम की उपलब्धता, वार्षिक सब्सक्रिप्शन और तकनीकी सहायता की भी जांच करें।
एक बात और ध्यान रखें—सिर्फ 4G सिम डाल देने से 2G वाला जीपीएस उपकरण 4G पर काम नहीं करने लगेगा। इसके लिए डिवाइस का हार्डवेयर और नेटवर्क सपोर्ट अनुकूल होना जरूरी है।
**कमर्शियल वाहनों के लिए अतिरिक्त सावधानी**
सार्वजनिक परिवहन और अन्य विनियमित श्रेणियों के वाहनों में निर्धारित मानकों के अनुरूप वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस की जरूरत हो सकती है। ऐसे वाहन मालिक बिना संबंधित नियमों की जांच किए पुराने उपकरण को न हटाएं और न ही उसकी जगह कोई सामान्य ट्रैकर लगाएं।
फिलहाल वाहन मालिकों को घबराने के बजाय अपने जीपीएस उपकरण की तकनीकी जानकारी जांचनी चाहिए। नेटवर्क बंद होने की अफवाहों के आधार पर जल्दबाजी में नया उपकरण खरीदने से बचें। मोबाइल ऑपरेटर और जीपीएस सेवा प्रदाता की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।
**सावधानी ही सुरक्षा है:** आपकी गाड़ी में जीपीएस लगा होना तभी उपयोगी है, जब डिवाइस सही तरीके से काम करे और उसकी लोकेशन आपके मोबाइल तक पहुंचती रहे।

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