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विकसित भारत का संकल्प पूरा करने के लिए एकजुट हों सभी धर्मों के लोग : राज्यपाल

बोधगया। 8 मई, 2026।मगध विश्वविद्यालय, बोधगया एवं धर्म संस्कृति संगम, गया के संयुक्त तत्त्वावधान में शुक्रवार को रामानुजन सभागार (गणित विभाग) में “भारतीय लोकतंत्र में सर्वधर्म समभाव की भूमिका एवं चुनौतियाँ” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी-सह-सांस्कृतिक समरसता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार के माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। माननीय राज्यपाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल देश की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक, सभ्यतागत, मानसिक एवं सामाजिक स्तर पर भी सुनिश्चित होती है। जब सभी धर्मों के लोग एकजुट होकर राष्ट्रहित में कार्य करते हैं, भारतमाता का जयघोष करते हैं तथा विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, तभी राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तविक अर्थों में सुदृढ़ होती है। उन्होंने कहा कि नालंदा-गयाजी-बोधगया कॉरिडोर भारतीयता का प्रतीक है और इस विरासत पर केवल भारत का अधिकार और स्वामित्व है।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, सहिष्णुता और आध्यात्मिक चेतना में निहित है। उन्होंने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और आपसी सद्भाव को लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। गयाजी और बोधगया से भक्ति और ज्ञान की धारा संपूर्ण विश्व को अपने में समाहित करेगी, ऐसा विश्वास है।

लखनऊ स्थित काली मंदिर के महंत स्वामी विवेकानंद गिरी जी ने धर्म के विभिन्न परंपराओं के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने माननीय राज्यपाल महोदय से मगध विश्वविद्यालय में बोधगया पीठ स्थापित करने और उस पर शोध प्रारंभ कराने का अनुरोध किया।

मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा सर्वधर्म समभाव की भावना में निहित है। उन्होंने कहा कि मगध विश्वविद्यालय शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक समरसता के मूल्यों को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की हाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

विशिष्ट वक्ता के रूप में लाओस मंदिर के प्रभारी बौद्ध भिक्षु साई शाना ने बुद्ध के करुणा, शांति और मानवता के संदेश को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सहकार्यवाह डॉ. मोहन सिंह एवं धर्म संस्कृति संगम के अध्यक्ष श्री संजय सिंह की भी महनीय उपस्थिति रही। कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम् ने सर्वधर्म समभाव को वैश्विक शांति और प्रगति का महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। डॉ. दीपशिखा पांडेय ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों, विद्यार्थियों, हिन्दू महात्माओं, बौद्ध भिक्षुओं, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
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