पटना। 3 मई 2026 से पश्चिम चंपारण के बेतिया से शुरू होने जा रही इंजीनियर निशांत कुमार की बहुचर्चित सद्भाव यात्रा को लेकर पूरे बिहार का सियासी तापमान बढ़ गया है। जदयू में शामिल होने के बाद निशांत कुमार की यह पहली बड़ी राजनीतिक यात्रा मानी जा रही है, जिस पर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक की पैनी नजर बनी हुई है।
इस यात्रा को सफल बनाने में प्रदेश स्तर पर कई नेता सक्रिय हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आचार्य डॉ. राहुल परमार की हो रही है। पटना से लेकर बेतिया तक सैकड़ों होर्डिंग, बैनर और स्वागत पोस्टर उनके नेतृत्व में लगाए गए हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि यात्रा की तैयारियों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आचार्य डॉ. राहुल परमार संगठन क्षमता, रणनीतिक सोच और कार्यकर्ताओं से मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। यही वजह है कि सद्भाव यात्रा के प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क अभियान में उन्हें प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान भी आचार्य डॉ. राहुल परमार सक्रिय रूप से मौजूद रहेंगे और विभिन्न जिलों में कार्यकर्ताओं के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके समर्थकों का कहना है कि बिहार की नई राजनीतिक पीढ़ी में परमार तेजी से उभरता चेहरा बन चुके हैं।
इधर, निशांत कुमार की इस यात्रा को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। माना जा रहा है कि यह यात्रा बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे सकती है। वहीं आचार्य डॉ. राहुल परमार की सक्रियता ने इस पूरे अभियान को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यात्रा को व्यापक जनसमर्थन मिला, तो आने वाले समय में आचार्य डॉ. राहुल परमार और इंजीनियर निशांत कुमार की जोड़ी बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकती है।

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